आपका घर संभल गया, लेकिन कामगारों का घर कब संभलेगा


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इस साल मार्च में लोकसभा में श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा था कि सरकार घरों में काम करने वालों के लिए राष्ट्रीय नीति बनाएगी ताकि उन्हें न्यूनतम मज़दूरी मिल सके और सामाजिक सुरक्षा की व्यस्था हो सके. वैसे यह बात सुनते सुनते तीन साल से ज़्यादा का वक्त गुज़र चुका है. 2015 में ही इस नीति का एक ड्राफ्ट कैबिनेट के सामने पेश किया गया था. जिसमें ये बात थी कि इन्हें कम से कम 9000 सैलरी मिले, साल में 15 दिन की अनिवार्य छुट्टी मिले और मातृत्व अवकाश भी मिले. यह नीति कब बनेगी सरकार ही बेहतर जानती है.

 

Massive Rally & Protest by Domestic Workers


 

Demanding Comprehensive Legislation for Domestic Workers and Withdrawal of the draft social security codes

On August 2nd at Parliament street

Ever since the GOI voted for ILO Convention 189, the domestic Workers in India have been demanding a Legislation to protect their rights. The statistics on domestic workers vary from 4.75 million (NSS 2005 data) to 6.4 million (Census data). Some reports say that the number of domestic workers may be up to 90 million in India. Domestic work has been increasing over the years (222% since 1999-2000). While paid domestic work was once a male dominated occupation in pre-independence India (Neetha 2004), today women constitute 71 percent of this sector. National estimates for 2004-5 suggest 4.75 million workers were employed by private households, making domestic work as the largest female occupation in Urban India. The data may be underreported because of several reasons, the main being that domestic work is not treated as ‘real’ work leading to large instances of undeclared work. Secondly, being within the home, domestic workers are largely invisible and thirdly, this can be a part time occupation, with workers taking up other seasonal occupations. The demand for domestic workers is also on the increase.

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Domestic workers seek social security law


ARYAN D’ROZARIONEW DELHI, AUGUST 03, 2018 01:46 IST
UPDATED: AUGUST 03, 2018 01:46 IST

Demand withdrawal of the Central government’s proposed labour code

Shouting slogans, hundreds of domestic workers marched from Mandi House to Parliament Street on Thursday demanding withdrawal of the Centre’s proposed labour code and introduction of a comprehensive law granting social security to domestic workers.

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निर्माण मज़दूरों के साथ आम सभा


10-07-2018 को किर्ती नगर चुना भटटी मे निर्माण मज़दूरों के साथ आम सभा का आयोजन किया गया। इस सभा मे 300 महिला व पुरूषों ने भाग लिया।
सभा मे दिल्ली निर्माण मज़दूर संगठन के कार्यकत्ताओं ने मज़दूरों को बताया केन्द्रीय सरकार द्वारा 44 श्रम कानूनों को किस तरह 4 कोड मे बदला जा रहा है और दिल्ली के श्रम विभाग मे पिछले दो महीनों से कोई काम नही हो रहा है, और बढते हुये भष्ट्राचार की जानकारी दी।
लेबर ओफिस मे किस तरह भष्ट्राचार रूपी दिमक हमारे कानून को समाप्त कर रहा है। यह विषय हमारे सामने भयंकर रूप धरण किये हुये खडी है। इससे निपटने की हमारी रणनीति क्या होगी।
मज़दूरों के सुझाव
पोस्टर व पर्चे के माध्यम से अपने क्षेत्र मे सभी मज़दूरों को इस विषय की जानकारी देना ।
जागरूकता के लिये, क्षेत्रीय पदयात्रा करना।
सभी लेबर ओफिसों मे धरना करेगें।
इस लड़ाई मे हम तन मन धन से संगठन के साथ मिलकर लडेगें व हमारे बच्चे भी लडेगे।
एक विशाल धरना उपराज्यपाल व श्रम मंत्री कार्यलय पर करेगें।
सभी मज़दूरों ने कहा हम इतनी आसानी से हम अपना कानून खत्म नही होने देगें आखिरी साॅस तक लडेगे।

‘हम अपना अधिकार माॅगते नही किसी से भीख माॅगते‘

घरेलू कामगारों के साथ नुक्कड बेठक


दिल्ली घरेलू कामगार संगठन के द्वारा घरेलू कामगारों के साथ नुक्कड बेठकों का आयोजन किया गया.साथ ही हस्ताक्षर अभियान का आयोजन किया गया.ताकी सरकार समाजिक सुरक्षा का कानून बनायें

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