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अधिकारी मालामाल निर्माण मज़दूर बेहाल

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Sub: Notice of peaceful dharna (sit-in) at your office for the below mentioned issues:

  1. Denying the registration, renewal and processing of claim applications of construction workers under Delhi Building & Other Construction Workers Welfare Board (DBOCWWB) by Labor department officers since May’2018.
  2. Non settlement of pending cases since long- Non issuing of pass books to verified construction workers, illegal detention of pass books for renewal, lapse cases and claim applications under various social security schemes of DBOCWWB.

दिनाॅक 12/09/2018 को दिल्ली निर्माण मज़दूर संगठन के हजारों श्रमिकों ने श्रमायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया। दिल्ली मे निर्माण मज़दूरों को दिल्ली भवन एवं सन्निर्माण बोर्ड के माध्याम से सामाजिक सुरक्षा देने का प्रावधान है। सामाजिक सुरक्षा का लाभ लेने के लिये मज़दूरों को इस बोर्ड मे पंजीकरण करवाना होता है। दिल्ली मे 2005 से इस बोर्ड मे पंजीकरण का कार्य शुरू हुआ। पंजीकरण का कार्य दिल्ली के नौ जिलों  मे होता है।

आज दिल्ली के सभी श्रम कार्यालयों मे भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है। दिल्ली मे मज़दूरों का पंजीकरण यूनियन के माध्यम से भी होता है। यूनियन के 90 दिन के काम के सर्टिफिकेट के आधार पर मज़दूरों का पंजीकरण होता है। आज दिल्ली मे 89 निर्माण क्षेत्र की यूनियन पंजीकृत है। इनमे से आधी यूनियन तो श्रम अधिकारियों ने अपने रिशतेदार, ड्राइवर या पहचान के लोगों के नाम पर पंजीकृत की है। इन यूनियन की कमाई का बड़ा हिस्सा श्रमाधिकारियों की जेब मे जाता है। बहुत सी दलाल यूनियन ऐसी भी है जो मज़दूरों से पंजीकरण के नाम पर जम कर पैसा कमा रहीं हैं। 500 से लेकर 2000 रूपये तक की वसूली कर यूनियन द्वारा गैर निर्माण मज़दूरों का पंजीकरण कराया जाता है। नियम के अनुसार सभी मज़दूरों को पंजीकरण के लिये जिला कार्यालय जाना अनिर्वाय है। इन यूनियनों द्वारा घर बैठे मज़दूरों का पंजीकरण किया जाता है। लाभ के प्रत्येक आवेदन पर अधिकारियों द्वारा 25 से 30 प्रतिशत की रिश्वत ली जाती है। जो मज़दूर रिश्वत नही देते उनकी फाइले पिछले छः वर्षों से जिला कार्यालयों मे धक्के खा रही है। प्रत्येक पंजीकरण पर 200 रूपये की राशि बोर्ड कर्मचारी एव श्रमाधिकारी वसूलते हैं। जो यूनियन रिश्वत नही देते उनके मज़दूरों को सत्यापन एवं पंजीकरण कार्ड नही मिलता। पिछले पाॅच वर्षो से दिल्ली निर्माण मज़दूर संगठन हर तीन माह पर एक लंबित आवेदनों की सूची मुख्यमंत्री, श्रममंत्री, श्रमायुक्त को भेजता है परन्तु इतनी शिकायतों के बावजूद भी इस भ्रष्टाचार को रोकने के लिये कोई कदम नही उठाया गया।

यूॅं तो दिल्ली सरकार पूरी दिल्ली मे कैमरे लगाने की योजना बना रही है परन्तु दिल्ली के सबसे भ्रष्ट विभाग जहाॅ मालिक एवं मज़दूरों से न्याय दिलवाने के नाम पर लाखों रूपये की वसूली होती है। वहां आज तक कैमरे नहीं है।

दिल्ली के दक्षिण पश्चिम जिले के सह आयुक्त ने तो फरवरी 2017 से अपने जिले मे पंजीकरण और नवीनीकरण का काम बंद कर रखा है। हजारों मज़दूरों के कार्ड नवीनीकरण के नाम पर जमा कर रखे है। आज तक उन मज़दूरों के कार्ड नवीनीकरण करके वापिस नही दिये गये। लगभग डेढ वर्ष से इस अधिकारी ने काम बंद कर रखा है और श्रमायुक्त ने इस अधिकारी के खिलाफ किसी भी विभागीय जाॅच के आदेश नही दिये। इस अधिकारी के अनुसार लेबर चैक पर खडे़ रहने वाले मज़दूर निर्माण मज़दूर नहीं है। तो क्या दिल्ली मे रहने वाले 35 लाख परिवार अपने घरो में निर्माण और मरम्मत के काम लिये बिहार, यूपी और राजस्थान से मज़दूर लाते हैं?

ऐसी ही स्थिति आज पश्चिमी जिले की भी है जहाॅं पिछले 18 महीनों से करीब 1000 निर्माण मज़दूरों के पहचान पत्र सत्यापन के बाद भी उन्हें नहीं मिले हैं। भ्रश्ट यूनियन के द्वारा आवेदित मज़दूरों के कार्ड 15 दिनों से 60 दिनों के अंदर मिल जाते हैं। यदि सही से जाॅंच की जाये तो इनमे आधे से ज्यादा गैर निर्माण मज़दूर मिलेंगे।

जब भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर पहुचा तो विपक्ष ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा मे एक थ्प्त् दर्ज की। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने थ्प्त् के माध्यम से भ्रष्टाचार की जाॅच शुरू की।

जब श्रमाधिकारियों को यह समझ आया की अब उनकी चोरी पकड़ी जाने वाली है तो बिना किसी आदेश के सभी जिला कार्यालयों ने पंजीकरण, नवीनीकरण और लाभ आवेदन का काम बंद कर दिया। आज पाॅच महीने से काम बंद है, तमाम शिकायतों के बाद श्रममंत्री ने 2 अगस्त 2018 को यह आदेश दिया की यदि अधिकारी काम नही करेगें तो उनपर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी।
श्रममंत्री के आदेश के बाद भी जब काम शुरू नही हुआ तो 23/08/2018 को श्रमायुक्त द्वारा एक आदेश संख्या F.127/Addl.L.C./Admn./order/2018/246 काम शुरू करने के लिये जारी किया गया परन्तु इस आदेष के बावजूद किसी भी जिले में काम शुरू नही हुआ।

श्रम विभाग मे फैले भ्रष्टाचार और गुण्डागर्दी के खिलाफ मजदूरों ने श्रमायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया तथा इस पूरे भ्रष्टाचार के संरक्षक अतिरिक्त श्रमायुक्त राजेन्द्र धर के खिलाफ जम कर नारे बाजी की तथा रिश्वत के पैसे सेे अर्जित उसकी सम्पत्ति की जाॅंच की मांग की।
अधिक जानकारी के सम्पर्क करेंः

रमेन्द्र कुमार
महासचिव, दिल्ली निर्माण मज़दूर संगठन
सदस्यः दिल्ली भवन एवं सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड
फोनः 9868815915 (रमेन्द्र कुमार)
फोनः 9891264064 (अनीता जुनेजा)


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