DELHI SHRAMIK SANGATHAN

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दिल्ली श्रमिक संगठन, क्षेत्रीय श्रमिक सम्मेलन

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Sub: Notice of peaceful dharna (sit-in) at your office for the below mentioned issues:

  1. Denying the registration, renewal and processing of claim applications of construction workers under Delhi Building & Other Construction Workers Welfare Board (DBOCWWB) by Labor department officers since May’2018.
  2. Non settlement of pending cases since long- Non issuing of pass books to verified construction workers, illegal detention of pass books for renewal, lapse cases and claim applications under various social security schemes of DBOCWWB.

क्षेत्रीय श्रमिक सम्मेलन
पश्चिम और दक्षिण पश्चिम जिले के 9 क्षेत्रो के श्रमिकों ने दिनाॅक 30 अगस्त 2018 को समुदाय भवन विकास नगर मे क्षेत्रीय श्रमिक सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन मे निर्माण श्रमिक एवं घरेलू कामगारों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के पहले सत्र मे अलग-अलग क्षेत्रो से आये निर्माण मज़दूरों के स्थानीय नेतृत्व ने अपने वक्तत्य रखे। 10 श्रमिकों ने अपने भाषण मे निम्नलिखित मुद्दों को शामिल किया।

वक्ताओं ने बताया कि मई माह से निर्माण मज़दूरों का पंजीकरण और नवीनीकरण का कार्य पुरी तरह से बन्द कर दिया गया है। मज़दूरों के लाभ आवेदन भी स्वीकार नही किये जा रहे है। काम क्यो बंद किया गया इसकी कोई जानकारी भी मज़दूरों को नही दी गई।
दक्षिण पश्चिम जिले मे फरवरी 2017 के बाद से न किसी मज़दूर का पंजीकरण किया गया और न ही किसी मज़दूर का नवीनीकरण हुआ है। मज़दूरों की पास बुक जिला कार्यालय मे जमा है कहा गया था हम एक माह मे पास बुक जांच के बाद वापिस कर देगें परन्तु आज डेढ़ वर्ष के बाद भी न तो हमारा नवीनीकरण हुआ और न ही हमें पास बुक मिली।

अकबर जी ने कहा कि आज दो सरकारों के झगड़ों मे श्रमिक बेहाल है और सभी तरह के लाभ से वंचित है। सरकारी अधिकारियों एवं यूनियनों ने गैर निर्माण मज़दूरों के पंजीकरण से जम कर पैसा खाया और आज सब अपने-आप को इमानदार बता रहे है। यदि अधिकारी ईमानदार होते तो भ्रष्टाचार होता ही नही।

गंगा ने अपने भाषण मे बताया कि जब हम पंजीकरण और नवीनीकरण के लिये जाते है तो बोर्ड के कर्मचारी हमें बहुत परेशान करते है। सुबह से शाम तक हम जिला कार्यालयों मे खड़े रहते है। जिला कार्यालयों मे न तो शौचालय की व्यवस्था है न ही पीने का पानी। सारा दिन धूप मे खड़े रहना पड़ता है। हमारे हाथ चैक किये जाते है अच्छे साफ कपड़े पहनने पर अपमानित किया जाता है। हमारे पैसो से बोर्ड के अधिकारियों को तनख्वाह दी जाती है और वह हमें ही अपमानित करते है और काम नही करते।
रज्जो ने बताया कि वह राजमिस्त्री है लेकिन उसे यह काम करने नही दिया जाता क्योकि वह महिला है। महिला का राजमिस्त्री बनना पुरूषों को अपना अपमान लगता है।

सभा के दूसरे सत्र मे घरेलू कामगारों ने अपनी समस्याये रखी

सुनैना ने बताया कि वह बचपन से कोठियों मे झाडू पोछे का काम कर रही है। आज तक सरकार ने हमारी सामाजिक सुरक्षा का कोई कानून नही बनाया। आज भी हम मालिकों के पुरी तरह से गुलाम है। जब हम मज़दूरी बढाने की बात करते है तो हमे काम से हटा कर दुसरी महिला को काम पर रख लेते है। त्यौहारों पर छुटटी नही मिलती तय काम से ज्यादा काम करवाती है। यदि काम पर पहुॅचने मे थोड़ी देरी हो जाये तो बहुत ही अपमानित करती है।

मेहजबीन ने बताया कि वह 25 वर्ष की है और वह 15 वर्ष की आयु से घरों मे काम कर हरी है। वह खाना बनाने का काम करती है। काम पर रखने के समय बताया गया कि परिवार मे चार सदस्यों का खाना बनाना है। जब काम करना शुरू किया तो हर हफ्ते घर मे मालिक किसी न किसी पार्टी का आयोजन करते रहते थे और उसी पैसे में सबका खाना बनाने की कहते जब इसका विरोध किया तो काम से निकाल दिया।

शीला जिनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है वह भी आज कोठी मे काम करने पर मजबूर है लोग उनसे पूरे घर का काम करवा लेते है बाद में पैसा मांगने पर 10-20 रूपये देकर भगा देते है। सरकार ने यदि हम जैसे कामगारों के लिये पेंशन की व्यवस्था की होती तो हमें आज इस उम्र मे काम नही करना पड़ता।

सभा के तीसरे सत्र मे संगठन के महासचिव श्री रमेन्द्र कुमार जी ने मज़दूरों को बताया कि निर्माण मज़दूर के पंजीकरण को बंद करने का कोई लिखित आदेश आज अधिकारियों के पास नही है। पिछले चार पाॅच वर्षो मे निर्माण मज़दूरों के पंजीकरण में भ्रष्टाचार बहुत तेजी से फैला है। आज दिल्ली मे 89 यूनियन पंजीकृत है। इस मे से अधिकतर यूनियन के पदाधिकारीयों निर्माण मज़दूरों के बारे मे कोई जानकारी नही है। उन्होने पैसे कमाने के लिये अधिकारियों की मिलीभगत से बड़ी संख्या मे बोर्ड मे गैर निर्माण मज़दूरों का पंजीकरण करवाया। इस भ्रष्टाचार की शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक शाखा मे की गई। FIR दर्ज होने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने जब इसकी जाॅच शुरू की तो अधिकारी बुरी तरह डर गयें, क्योकि वह सब इस भ्रष्टाचार में शामिल थे। डर के कारण उन्होने काम बंद कर दिया।

घरेलू कामगारों के लिये सरकार सामाजिक सुरक्षा का कानून बनाये संगठन इस मांग को लगातार उठा रहा है। अब इस मांग को तेजी से उठाने की आवश्यकता है। केन्द्रीय कानून से पहले हमें दिल्ली सरकार से यह मांग करनी चाहिये कि वह घरेलू काम को रोजगार सुची मे शामिल करे तथा घरेलू कामकारों के लिये न्यूनतम मज़दूरी तय करे। लगातार प्रयास के बाद भी श्रम विभाग हमारी मांग नही मान रहा, तो आप सुझाव दे कि संगठन को क्या करना चाहिये। हमने निर्माण मज़दूरों को काम शुरू करने के लिये उपराज्यपाल एवं मुख्य सचिव को पत्र भी लिखा है। साथ ही साथ दिल्ली की श्रमायुक्त एवं श्रम मंत्री को भी पत्र लिखा है और आज की सभा का एक ज्ञापन बनाकर उपस्थित श्रमिकों के हस्ताक्षर के साथ हम यह ज्ञापन उपरोक्त अधिकारियों को जमा भी कर देगें यदि उसके उपरान्त भी काम नही होता है संगठन को क्या करना चाहिये।

सभी साथियों ने सुझााव दिया कि उपराज्यपाल एवं श्रमायुक्त कार्यालय पर धरना देना चाहिये।

दिल्ली श्रमिक संगठन की उध्यक्षा अनीता जी ने इस निर्णय को सभा मे पारित करवाया। धरने से पहले ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रो मे सभाये की जायें ताकि इस कार्यक्रम के लिये सवकी सहमति ली जा सके। लोकतन्त्र मे प्रदर्शन इस बात का सकेंत है कि हम जिन्दा है और अन्याय से लड़ने के लिये तैयार हैं।

इस फैसले के साथ सभा का समापन किया गया।


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