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माया के संघर्ष की कहानी माया की जुबानी

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माया के संघर्ष की कहानी माया की जुबानी

माया का जन्म गाॅव-अतराहा, जिला-छत्तरपुर, म0प्र0 मे हुआ। माया को अपनी जन्म तिथि पता नही है। उसकी माॅ कहती है जिस साल बहुत सुखा पड़ा था उस साल मे पैदा हुई थी। माया तीन बहन दो भाई है, माया कभी स्कूल नही गई। माॅ बाप निर्माण मज़दूर का काम करते थे, रहने की जगह स्थाई नही थी। कभी कहाॅ कभी कहाॅ मैं पढ नही पाई, भाईयों को तो पढा दिया पर लड़कियों का पढ़ना जरूरी नही समझा। माया की शादी 13 साल की उम्र मे हुई, माया को शादी का वास्तविकता पता नही थी, पडोस मे शादी देखी, शादी मे गहने, कपडे, लडकी को मिलना अच्छा लगा, उसी को माया शादी समझ रही थी।

माया की शादी मे गहने, कपडे तो मिले पर दो दिन बाद ही ससुराल वालो ने वापस ले लिये माया बहुत रोई दो साल बाद माया का गोना हुआ। माया गाॅव से दिल्ली मे मीरा बाग की झुगियों मे आ गई। ससुराल का घर देख कर माया रोने लगी 10-12 गज की कच्ची झुग्गी छप्पर पडी हुई, उसी मे सास, ससुर, देवर, पति और माया रहते थें। एक साल तक ससुराल वालो ने उसे मायके नही भेजा जब पिता लेने आये, छोटी बहन की मृत्यु पर तब भी मना कर दिया कहा हम अपने आप ले आयेगें।

शादी के समय कहा कि लडका ड्राइवर का काम करता है 18000 कमाता है परन्तु सच्चाई थी की नौकरी स्थाई नही थी और 1500 रू महीना कमाता था। घर की स्थिति बहुत ही तंग थी। रोज घर मे कलेश सास ने घर का माहोल बहुत खराब कर रखा था। मेरा पहला बच्चा हुआ सास ताने देने लगी घर पर सारा दिन बैठी रहती है सोती रहती है काम पर जा छह महीने के बच्चे को छोड कर दिहाडी का काम किया काम करने पर भी घर का कलेश खत्म नही हुआ 50 रूपये दिहडी मिलती थी, परन्तु रोज काम नही मिलता था। छह साल मे तीन बच्चे हो गये दो लडकीयाॅ एक लडका। सास ने घर से निकाल दिया छोटे-छोटे बच्चो को लेकर भटकती रही, पति के मालिक ने अपने पुराने घर मे रखा। दिन मे ड्राईवर का काम करो रात मे चैकीदारी कुछ साल वहाॅ रहे मालिक से कर्जा लेकर छोटा सा प्लाट लिया। मालिक ने कर्जा तो दिया परन्तु मालिक ने पति की तनख्वाह बन्द कर दी, घर के खर्चे की जिम्मेदारी माया के कंधो पर आ गई कभी दिहडी, कभी कोठी मे जो काम मिलता रात दिन एक करके माया ने घर चलाया, हार नही मानी काम तो ठीक है परन्तु घर मे हिंसा खत्म नही हुई बस रूप बदल गया पहले सास मारती थी ताने देती थी, अब यह काम पति करने लगा। बात बात पर लड़ना गली देना मारना गली मोहल्लो के लोगो को इकटटा करना बेज्जत करना घर से निकालने की धमकी देना। माता पिता गरीब थे मायके का सहारा भी नही था। माया बस काम काम और काम मे ही आपना जीवन बिताने लगी सुबह 8 बजे घर का सारा काम करके निकलती रात 8 बजे 9 बजे जक मशीन की तरह काम करती थी। माया मे एक आदत शुरू से थी जब भी उस पर हिंसा होती चुप नही बैठती थी जितनी ताकत थी लडती जरूर थी। सयम बीतता गया बच्चे बडे हो गये परन्तु माया की परेशनीया काम नही हुई, पति का अत्याचार अभी भी जारी था।

माया संगठन मे 2008 से जुडी महिलाओं के कार्यक्रम मे एक मीटिंग मे माया ने रोरोकर अपनी कहानी बताई माया ने कहा मै काम से नही घबराती पर घर पर कलेश जब होती तो मर जाने को मन करता है तीन बच्चे है अगर नही होते तो शायद मर जाती। मीटिग मे माया को सभी बहुत समझाया प प्यार किया, हिम्मत मत हारो हिंसा करना पाप है मो हिंसा सहना भी पाप है। अपनी बात अपने परिवार के सामने रखो लड़ो नही। 2 साल पहले जब उसके पति ने घर पर झगड़ा किया तो माया ने हिंसा का जवाब पहली बार हिंसा से दिया दो थप्पड़ पति को मारे कहा तुम मुझे क्या घर से निकालोगे आज मैं तुम से तलाक माॅगती हुॅ। इतने सालो से मै सहती रही चुप रही इसका तुमने फायेदा उठाया पर अब और नही। यह माया ने अकेल नही पडोसियो व सास के सामने कहा। उसका पति चैक गया इतनी हिम्मत कहाॅ से आई। इसी मुददे पर उसकी सास व पति ने कुछ दिनो बाद बस्ती मे पंचायत भी बैठी और माया पर इल्जाम लगाया कि पति सास देवर से लडना काम न करना बदतमीज करना। माया पहले पंचायत मे जाने से घबराई संगठन की दीदी को फोन भी किया उन्हे कहाॅ आप डरों मत आप अपनी बात तर्क पूर्वक कहना लडना मत पर गलत के खिलाफ जो आवाज अपने उठाई है उसे जारी रखना अपना पक्ष रखना उनका भी सुनना। माया की जिन्दगी का पहला अवसर का जब वहाॅ समाज मे अपने हक की बात रखने जा रही थी। इसमे उसकी बेटिया व बेटा भी उनके साथ थे। उसने भरी पंचायत मे कहा मेरा पति पिछले 6 साल से एक रूपये घर खर्च के लिये नही देता था मैने अकेले अपने दम पर घर चलाया बच्चो को पाला पोसा। इस आदमी की हर जरूरत को पुरा किया, तब भी वहाॅ मारता था व गालियाॅ देता था। तब यह पंचायत कहाॅ थी 12-12 घण्टे काम करना घर की जरूरत को पुरा करना एक वक्त की रोटी खाकर मैने काम किया है। तब पंचायत कहाॅ थी जब यह आदमी घर चला नही सकता तो इसने तीन बच्चे क्यो पैदा करे।

.उस समय बस्ती की कुछ महिलाओं ने जो संगठन से जुडी थी रिश्ते मे भी माया के परिवार से थी उसका साथ दिया। पंचायत ने कहाॅ आप क्या ये कहना चाहती हो कि पति बहुत गलत है तो भरी पंचायत मे उसके मुॅह पर चप्पल मारों। माया ने कहाॅ नही मै कहती हुॅ कि वो गलत है पर इस तरह उनको मारना भी तो गलत है मै बस उनको उनकी गलती का ऐहसास करवाना चाहती हुॅ इस तरह माया ने यह जंग जीती।
जब हमने माया से पूछा संगठन से जुडने पर आपके अन्दर क्या बदलाव हुये तो उसने बताया
ऽ सबसे पहले मेरी सोच मे बहुत बडा बदलाव आया पहले मै समाज के नियमो का सही मानती थी आॅख बन्द करके मानती थी पर मैने मीटिंग मे जाना कि यह नियम किसी भगवान ने नही पुरूषों ने हमारे समाज ने बनाये है। तो मेरी सोच मे बदलाव आया।
o घर से बाहर कही दूर जाने मे डरती थी अब डर दूर हो गया।
o कानून की जानकारी नही थी वो भी मिली।
o अपने अधिकारों के बारे मे पता चला।
o हमारे समाज मे हो रहे भेदभाव के बारे गहराइ से जानकारी मिली।
o सोचने की दिशा बदली।
o आत्माविश्वास आया, बोलने की ताकत मिली अब किसी से नही डरती हुॅ।

अन्त मे माया ने बताया कि उसके लडके ने अपने लिये मुस्लिम लडकी पंसद कर ली है। जब वे पकडे गये तो दोनो परिवारों मे इसका बहुत विरोध हुआ। माया का पति ने भी साफ इनकार कर दिया कहाॅ कि शादी नही होने देगे। व लडकी के पिता ने कहाॅ मै अपनी लडकी को जान से मार दूगाॅ पर हिन्दू मे शादी नही कॅरूगा। माया ने पहले अपने बेटे को समझाया कि प्यार का भूत ज्यादा दिन नही चलता है पिता की बात मान ले पर जब उसने देखा उसका बेटा और उसकी दोस्त ने शादी का फैसला कर लिया है या दो हम शादी करेगे य फिर जान दे देगें। तो माया ने अपने बेटे का साथ दिया। लडकी के पिता ने जब ज्यादा हिंसा लडकी पर करी तो वह पुलिस स्टेशन चली गई और जाकर अपना बयान दिया मै प्रकाश माया के लडका से शादी करना चाहती हुॅ पुलिस ने माया को फोन करके बुलाया व लडकी के बाप को भी। उस समय माया ने प्रकाश व उसकी दोस्त का साथ दिया बोली मै शादी के लिये तैयार हुॅ मै अपनी मर्जी से इनकी शादी करवाउगी लडकी के पिता ने बहुत ड्रमा किया। पुलिस ने धमकाया भी। दो दिन मे माया ने अपने बेटे की शादी आर्य समाज मंदिर मे करवाई बिना अपने पति व सास की सहमति से यह फैसला उसने कहाॅ मैने बहुत सोच समझ कर लिया है। पहले मै इसे गलत समझती थी फिर मैने सोचा की हम अपनी जिद पर अडे रहे तो इससे क्या होगा बच्चो की जिन्दगी है हमे उन्हे उनकी जिन्दगी उनके अनुसार जीने देना चाहिये। यह उनका अधिकार है माया ने कहाॅ मै अभी भी बहुत कुछ सीखना चाहती हुॅ।
o औरो के लिये मै उदारहण बनना चाहती हुॅ
o अपने गुणो को बढना चाहती हुॅ
o पढना चाहती हुॅ
o अपने जैसी 100 माया खडी करना चाहती हुॅ
o जीवन मे आगे बठना चाहती हुॅ

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