Year: 2017

दिल्ली घरेलू कामगार संगठन के द्वारा पश्चिम विहार की तीन बस्तियों मे क्षेत्रीय रैली का आयोजन किया गया।


क्षेत्रीय रैली पश्चिम विहार

दिल्ली घरेलू कामगार संगठन के द्वारा पश्चिम विहार की तीन बस्तियों मे क्षेत्रीय रैली का आयोजन किया गया। इस रैली मे मीरा बाग, डेरी वाला बाग और जन्माष्टमी पार्क के 200 घरेलू कामगार महिलाओं ने भागीदारी की।

क्षेत्रीय रैली का उद्देशय

1 घरेलू काम के काम को सम्मान का दर्जा दिया जाये।
2 काम का पूरा दाम दिया जाये।
3 घरेलू काम को रोजगार सूची मे शामिल किया जाये।
4 घरेलू कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का कानून बने।
5 संगठन की ताकत मजबूत हो, ज्यादा से ज्यादा संगठन का विस्तार हो,

पश्चिम विहार के घरेलू कामगार महिलाओं ने रैली का उद्देश्य बताया।

मायाः- हम महिलाऐ कामजोर नही है हमे अपनी ताकत को दिखाने की जरूरत है और इस रैली के माध्यम से हम मालिकों को अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करेगें।
मनहोरीः- तीनो बस्ती की घरेलू कामगार आज इक्कठा है हमारी ताकत आज तीन गुणा बढ गई है। पश्चिम विहार की सभी घरेलू कामगारों को हमे जोड़ना है सरकार जब कानून बनाऐगी तब ठीक है। हम सब मिलकार अपने काम की स्थिति को ठीक करेगें। 4 छुटटी और काम का दाम हम सब मिल कर तय करेगें।
अनीताः-  हम सब एक है, घरेलू कामगारों की एकता जिन्दाबाद! महिलाओं की एकता जिन्दाबाद!

Workshop to empower women in informal sectors


रनहोला मे युवा लड़कियों के साथ लिंग भेद एवं बाल विवाह के मुद्दे पर चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिता का अयोजन किया गया।


सब को पत्नी, बहु, भाभी, चाची, बूआ चाहिये लेकिन बेटी किसी को नही चाहिये

रनहोला मे युवा लड़कियों के साथ लिंग भेद एवं बाल विवाह के मुद्दे पर चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिता का अयोजन किया गया। लडकियों ने अपने घर एवं समाज की स्थिति को देखते हुये चर्चा किया कि हमारे साथ जो लिंग भेद होता है हम उसको खत्म करेगे और अपनी माता/पिता को भी प्रतियोगिता के माध्यम से जानकारी देगें की लिंग भेद एवं बाल विवाह नही होना चाहियें।

संगीताः- मेरे पापा मुझे कही जाने नही देते अभी मुझे मेरे पापा रोकते है, शादि के बाद पति रोकेगा क्या मेरे साथ यही होगा।

अन्नूः- मेरे पापा नही है, मम्मी कही बाहर नही जाने देती पढ़ाई करने का क्या फायदा बाहर समाज की काई जानकारी नही होती।

शिवानीः- समाज मे कई तरह के भेद भाव है जिसमे से लिंग भेद बहुत बड़ा मुद्दा है। इस को खत्म होने मे बहुत समय लगेगा पर आप ने जो पहल की है वहाॅ बहुत जरूरी है इस समस्या को खत्म तभी कर पायेंगे जब हम इसे समझेंगे।

आधुनिक युग मे यानि 21वी शताब्दी मे मध्यम वर्ग से लेकर उच्च वर्ग के परिवारों मे केवर एक ही समस्या होती है लिंग भेद को लेकर आज के समय मे यदि किसी परिवार मे बेटा पैदा हो तो बहुत खुशी होती है वही परिवार मे बेटी पैदा हो जाये तो बहुत दुख होता है क्योकि भारत एक पुरूष प्रधान देश है भारत के लोगो का मानना है कि बेटा पीढी बनाता है और बेटी पराया धन होती है। ज्यादातर लडकियों को पेट मे ही मार देते है इसे कन्या भ्रूण हत्या कहते है, यह ज्यादातर हरियाणा, राजस्थान, बिहार मे होता है।
पूजा

विज्ञान की तीसरी आॅख से दिखाई जाती है बेटियाॅ जन्म देने से पहले कोख मे दफनाई जाती है बेटिया। बेटी के जन्म देने से पहले माॅ की कोख मे यह जान लिया जाता है कि माॅ की कोख मे जो शिशु पल रहा है वह बेटा है बेटी। बेटी का पता चलते ही उसे गर्भ मे ही मार दिया जाता है। बेटी जन्म लेते ही उसे पिता का बोझ माना जाता है। घर का काम सीखाया जाता है, बेटिओं को शिक्षा के लिये न तो विद्यालय मे भेजा जाता है और ना ही घर से बाहर भेजा जाता है। घर मे बेटा होता है तो बहुत खुशिया मनाई जाती है घर मे ढोल बजाये जाते हैै, लडको को पढने का अधिकार दिया जाता है, लेकिन लडकियों को पढने का अधिकार नही दिया जाता है। हमारे समाज मे लड़कियों को गंदी नजर से देखा जाता है, लड़कियों के साथ अत्याचार किया जाता है। कुछ लड़कियों की बचपन मे ही शादी कर दि जाती है और उसके साथ अधिक अत्याचार किया जाता है।
विनीता

सभी लड़कियों ने चित्रकला बनाये एवं निबंध लिखे।

 

पश्चिम विहार की तीन बस्तियों से 47 किशोरियाॅ, दिल्ली भ्रमण के लिये गई।


दिल्ली श्रमिक संगठन के द्वारा पश्चिम विहार की तीन बस्तियों से 47 किशोरियाॅ, दिल्ली भ्रमण के लिये गई।

भ्रमण का उददेश

हमारा समाज खासकर लडकीयों को सीखने व घुमने का अवसर नही देता है। अगर व कुछ करना चाहती है या घूमने जाना चाहती है तो उसे समाज इजाजत नही देता है।

संगठन लगातार दिल्ली के कई क्षेत्रो मे किशोरियों के साथ समझ निर्माण

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नेतृत्व क्षमता विकास कार्यशाला


नेतृत्व क्षमता विकास कार्यशाला का आयोजन ऋषिकेश के स्वतंत्रतानंद आश्रम में हुआ इस कार्यशाला में 40 महिला पुरषो ने भाग लिया।

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महिला निर्माण श्रमिकों के साथ कौशल विकास पर कार्यशाला का आयोजन


दिनाॅक 22/08/2017 को महिला निर्माण श्रमिकों के साथ कौशल विकास पर कार्यशाला का आयोजन लोखण्डे भवन मे किया गया। इस कार्यशाला मे 60 महिला श्रमिकों ने हिस्सा लिया। इस कार्यशाला मे सहयोग विहार, मोहन गार्डन, शिव विहार, मीरा बाग, जन्माष्टमी पार्क तथा डेरी वाला बाग की महिला श्रमिकों ने हिस्सेदारी की। इस कार्यक्रम मे BWI और DGB ने सहयोग किया।
रमेन्द्र कुमार जी ने कार्यशाला का संचालन करते हुये महिलाओं से पूछा कि आज महिलाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण लेने की अवश्यकता क्यो है। महिलाओं ने बताया की हमारे पास हुनर नही है इसलियें हम पूरा जीवन काम करते है उसके बाद भी हमें सम्मान नही मिलता, काम की पूरी मजदूरी नही मिलती हमें शोषित मजदूरी मे काम करना पडता है। देश मे महिला पुरूष की समान मजदूरी का कानून है फिर भी हमें पुरूष के मुकाबले कम मजदूरी मिलती है। ढेकेदारों द्वारा महिला श्रमिकों की मजदूरी का शोषण होता है। अगर हम प्रशिक्षण लेते है तो हमारी मजदूरी बढती है जिससे हमे घर और समाज मे सम्मान मिलेगा। काम करना हमारी मजबूरी है यदि हम पति-पत्नी दोनो मिलकर काम नही करेंगे तो घर का गुजारा कैसे होगा।

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दिल्ली निर्माण मजदूर संगठन द्वारा क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन


दिनाॅक 04/08/2017 को चन्दर विहार, निलोठी, मे निर्माण मज़दूरों के क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन मे 300 श्रमिकों ने हिस्सेदारी की।
सम्मेलन मे सहभागियों का स्वागत जया जी ने किया। संगठन की वार्षिक रिर्पोट संगीता जी ने प्रस्तुत की और संगठन के समक्ष चुनौतियाॅ एवं उनका सामूहिक हल पर अपना वक्तव्य रखा। संगठन का परिचय आरती जी ने दिया। साथ ही साथ संगठन की मजबूती और सामूहिकता के कई उदाहरण रखें। Continue reading “दिल्ली निर्माण मजदूर संगठन द्वारा क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन”

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