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उपराज्यपाल निवास पर निर्माण मज़दूरों का धरना

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Sub: Notice of peaceful dharna (sit-in) at your office for the below mentioned issues:

  1. Denying the registration, renewal and processing of claim applications of construction workers under Delhi Building & Other Construction Workers Welfare Board (DBOCWWB) by Labor department officers since May’2018.
  2. Non settlement of pending cases since long- Non issuing of pass books to verified construction workers, illegal detention of pass books for renewal, lapse cases and claim applications under various social security schemes of DBOCWWB.

दिल्ली के निर्माण मज़दूरों की संयुक्त कार्यवाही समिति के द्वारा दिनाॅक 02-05-2014 को उपराज्यपाल के निवास पर एक धरने का आयोजन किया गया। इस धरने में दिल्ली के विभिन्न इलाको से सैकड़ो की संख्या मे निर्माण मज़दूरों ने भाग लिया।
निर्माण मज़दूरों के प्रतिनिधियों ने धरने को सम्बोधित करते हुये बताया कि दिल्ली में निर्माण मज़दूरों का काम और जीवन पूर्णतया असुरक्षित है। यह असुरक्षा तब है जबकि दिल्ली भवन एवं सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड मे 1200 करोड़ से ज्यादा रूपया जमा है।

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आज दिल्ली षहर का कोई भी निर्माण मज़दूर बीमार पड़ता है या काम के दौरान किसी दुर्घटना का षिकार होता है तो बोर्ड के द्वारा उसे किसी तरह का लाभ नही मिलता। यह बोर्ड एक त्रिपक्षीय बोर्ड है जिसमें नियोक्ता, मज़दूर एवं सरकार के प्रतिनिधि बराबर की संख्या में होने चाहिये, लेकिन दिल्ली के बोर्ड पर श्रम विभाग के नौकरषाहों का कब्जा है। जो कभी साइकिल, कभी प्रेषर कुकर के नाम पर मज़दूरों के हिस्से के पैसे को खाने की योजना बनाते रहते हंै। यही कारण है कि बोर्ड बनने के 12 वर्श बाद भी दिल्ली का निर्माण मज़दूर तथा उनका परिवार असुरक्षा का जीवन जी रहा है।

बोर्ड के पदाधिकारी इस कानून का लाभ मज़दूरों तक नही पहुॅचाना चाहते। इसलिये रोज नये नियम बना मज़दूरों के पंजीकरण पर रोक लगाते रहते हैं। हाल ही में 27-02-2014 को बोर्ड ने एक नया सरकुलर निकाला है इसके अनुसार निर्माण मज़दूरों का पंजीकरण तभी होगा जब उनके पास जन्म प्रमाण-पत्र और दिल्ली में रहने का प्रमाण होगा तथा जब मज़दूर स्वयं पंजीकरण और नवीनीकरण के लिये श्रम कार्यालय आयेगा। निर्माण के क्षेत्र मे काम करने वाले अधिकतर मज़दूर अषिक्षित है इसलिये उनके पास जन्म प्रमाण-पत्र नही होता और ये मज़दूर दूसरें राज्यों से पलायन करके आते है इसलिये सभी श्रमिको के पास रहने का सबूत नही होता। इसलिये बोर्ड में इन मज़दूरों का पंजीकरण भी नही हो पा रहा है। पिछले दो महीनों में बोर्ड में पंजीकरण न के बराबर है। जो मज़दूर यह दस्तावेज जुटा पाते है उनके पंजीकरण में 2 माह से आठ माह का समय लगता है।

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पंजीकृत मज़दूर के रिर्काड सभी कार्यालयों मे ठीक प्रकार से नही रखे जाते जिससे मज़दूरों को लाभ लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। एक वर्श से भी ज्यादा समय से मज़दूरों के लाभ के मामले श्रम कार्यालयों में लम्बित पड़ें है जिसे कोई देखने वाला नही है। बोर्ड के पैसे से जिन कर्मचारियों को तनख्वाह दी जाती है वह श्रम विभाग का काम करते हैं, बोर्ड का काम नही करते अगर यूनियन या मज़दूर उन्हंे काम करने को कहते है तो वह मज़दूरों के साथ मारपीट करते हैं तथा यूनियन का पंजीकरण रद्द करने की धमकी देते हैं। उच्च अधिकारी से लिखित षिकायत करने पर भी किसी कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्यवाही नही होती है।
उपराज्यपाल को भी इन तमाम परेषानियों को लेकर कई ज्ञापन दिये परन्तु किसी भी ज्ञापन का जवाब नही मिला, इसी से दुखी होकर निर्माण श्रमिकों ने सांकेतिक प्रदर्षन किया है। यदि उपराज्यपाल इस पर तुरन्त कार्यवाही नही करते है तो मज़दूर एक विषाल प्रदर्षन का आयोजन करेंगे।
धरने में दिल्ली निर्माण मज़दूर संगठन, निर्माण मज़दूर पंचायात संगम, सेवा, सी.टू, ए.आई.सी.सी.टी.यू, टी.यू.सी.सी के श्रमिकों ने भाग लिया। श्री सुभाश भटनागर, श्री रमेन्द्र कुमार, अनुराग सक्सेना, श्रीमती लता, श्री द्विवेदी तथा अन्य साथियों ने धरने को सम्बोधित किया


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