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कुकुरमुत्तों की तरह फैलती यूनियने

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दिल्ली निर्माण मज़दूर संगठन द्वारा निर्माण मज़दूरों के बीच में चलाये जा रहे जागरूकता अभियान के दौरान अन्य मज़दूर यूनियन के गोरखधन्धों के बारे में कई चैंकाने वाले सच निकल कर के सामने आये। त्रिलोकपुरी 5 ब्लाॅक में कुछ महिलाओं ने बताया कि कुछ मैडम लेबर कार्ड बनाने के लिये उन्होंने 400 रूपये लिये लेकिन आज पूरे छहः महिने हो चुके हैं न तो लेबर पासबुक का पता है और न ही उन मैडम लोगों का। उन्होंने बताया कि जब भी हम फोन करते हैं तो कोई फोन नहीं उठाता है। कल्याण पुरी 11 ब्लाॅक में कुछ निर्माण मज़दूरों ने बताया कि कुछ लोग आये थे लेबर पासबुक का फाॅर्म भरने ने उन लोगों ने प्रत्येक मज़दूर से फाॅर्म भरने का 500 रूपये लिया। और बताया कि जब से हमारी पासबुक बनी हैं तब से हमें किसी प्रकार का  कोई लाभ नहीं मिला है। 

हमें यह जानकर बहुत हैरानी हुई कि किसी भी निर्माण मज़दूर को यह नहीं बताया गया कि यह पासबुक किस काम आयेगी और साल पूरा होने पर इस बुक का नवीनीकरण कहां होगा। मज़दूर भाईयों के मन में उन यूनियन के लोगों के प्रति गुस्सा देखते ही बन रहा था। कुछ लोगों ने गाली का प्रयोग करते हुये कहा कि सभी यूनियने चोर हैं गरीब मज़दूरों का भला करने के नाम पर हमारी मेहनत के पैसे हमसे लूटकर ले जाते हैं।

संगम विहार में जागरूकता अभियान के दौरान कुछ निर्माण मज़दूरों ने हमें बताया कि फला यूनियन ने हमारा लेबर पासबुक बनवाने के लिये 170 रूपये लिये लेकिन रषीद में 120 रूपये ही लिखे। जब हमने उनसे पूछा कि आपने 170 रूपये लिये हैं और आप रषीद 120 की क्यों दे रहे हो तब उन्होंने कुछ जबाव नहीं दिया। और पांच महिने से ज्यादा हो गया लेकिन आज तक हमारा लेबर पासबुक बनकर नहीं आया।

ऐसी धोखेबाज यूनियनों की संख्या कुकुमुत्तों की तरह प्रतिदिन बढ़ रही है जिन्हें निर्माण मज़दूरों के कानून के बारे में जरा भी ज्ञान नहीं है। ऐसी ही यूनियनों ने बाकी यूनियनों का भी नाम खराब कर रखा है, आज के समय में मज़दूर यूनियन का नाम सुनते ही आग बबूला हो जाता है और न चाहते हुये भी उनके मुख से यूनियनों के लिये अपशब्द निकल ही आते हैं। जो ईमानदार यूनियन हैं और ज़मीनी तौर मज़दूर के हित में काम कर रही हैं, ऐसी धोखेबाज़ यूनियनों की वजह से लोगों को संगठित करने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

लेबर पासबुक बनने के बाद निर्माण मज़दूरों को जो लाभ मिलने होते हैं जैसेः- बच्चों की शिक्षा के लिए वजीफा, मज़दूर की दुर्घटना या मृत्यु होने पर मुआवजा, बुढ़ापे पेंशन, अंग भंग होने पर विक्लांगता पेंषन इत्यादि। यह फायदे तभी मिलते हैं जब निर्माण मज़दूर प्रत्येक वर्ष अपनी लेबर पासबुक की दिल्ली भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड में समय पर नवीनीकरण कराता है।

धोखेबाज यूनियन इस प्रकार की कोई भी जागरूकता मज़दूरों के बीच में नहीं फैलाते हैं बस यह एक बार कैम्प लगाकर फाॅर्म भर कर ले जाते हैं। उसके बाद इनको निर्माण मज़दूरों और उनकी समस्याओं से कोई मतलब नहीं रहता है।
हम यहां यह साफ कर दें कि सभी यूनियन धोखेबाज नहीं होती हैं। हम यह रिपोर्ट उन निर्माण मज़दूरों के बयानों और तथ्यों के आधार पर लिख रहे हैं जो हमें मिले हैं। हम चाहते तो उन धोखेबाज यूनियनों के नाम इस रिपोर्ट में लिख सकते थे। लेकिन हमने ऐसा नहीं किया क्यों कि हम चाहते हैं वह इस रिपोर्ट को पढ़े और मज़दूरों के साथ विश्वासघात न करें।

-Ravi Kumar Saxena

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