DELHI SHRAMIK SANGATHAN

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Sub: Notice of peaceful dharna (sit-in) at your office for the below mentioned issues:

  1. Denying the registration, renewal and processing of claim applications of construction workers under Delhi Building & Other Construction Workers Welfare Board (DBOCWWB) by Labor department officers since May’2018.
  2. Non settlement of pending cases since long- Non issuing of pass books to verified construction workers, illegal detention of pass books for renewal, lapse cases and claim applications under various social security schemes of DBOCWWB.

वार्षिक  सम्मेलन एवं परामर्ष सभा

दिल्ली निर्माण मज़दू संगठन द्वारा 19 फरबरी 14 को गुजराती समाज सभागृह सिविल लाइन दिल्ली में वार्शिक सम्मेलन एवं परामर्श  सभा का आयोजन किया गया।
सम्मेलन का शुभआरम्भ मुख्य अतिथियों से दीप प्रज्वलित कर एवं संगठन के जन गीतों से किया गया। अनिता जुनेजा जी ने दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों से आये संगठन के सदस्यों का स्वागत किया एवं कार्यकर्ताओं द्वारा मुख्य अतिथियों एसपी तिवारी जी, पियूश जी, निर्माण मज़दूर संगम पंचायत के सुभाष भटनागर जी और बिरजु नायक जी, दिल्ली भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के श्रमायुक्त जितेन्द्र जी और पष्चिमी जिला के श्रमायुक्त लल्लन जी का स्वागत गुलदस्ता देकर किया गया।Image

निर्माण मज़दूरों ने बोर्ड के श्रमायुक्त से सवाल करते हुये कहा कि प्रसूति सहायता, मृत्यु मुआवजा, दुर्घटना मुआवजा और छात्रवृत्ति सहायता देने में दो-दो साल लगा दिये जाते हैं और राष्ट्रीय  स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत स्मार्ट कार्ड बने लेकिन इसका लाभ मज़दूरों को नहीं मिला। तरह तरह के दस्तावेज मांग कर मज़दूरों को इतना उलझा दिया जाता है कि मज़दूर अपने हक़ के लाभ लेने से भयभीत हो उठता है। मज़दूरों ने श्रमायुक्त से निवेदन किया हर पंजीकृत निर्माण मज़दूरों को समय पर लाभ देने का प्रयास करें ताकि मज़दूर उत्साह के साथ अधिक से अधिक बोर्ड में अपना पंजीकरण करवाएंi

दिल्ली भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के श्रमायुक्त जितेन्द्र जी ने मज़दूरों के सवालों के जबाव देते हुए कहा कि हम मानते हैं बोर्ड में बहुत सी खामियां हैं। और उन्होंने कहा कि खामियां दूर करने के लिये बोर्ड और मज़दूर भाईयों को मिलकर ठोस कदम उठाने पडे़गे। इसी के साथ उन्होंने बोर्ड के काम भी गिनायें। 31 जनवरी 12 तक, 1 लाख 78 हज़ार 485 निर्माण मज़दूरों का बोर्ड में पंजीकरण हो चुका है। और 1 लाख 7 हज़ार 956 मज़दूरों ने समय पर नवीनीकरण कराया है। 55 लोगों को मृत्यु लाभ दिया गया, 23 लोगों को अंतिम संस्कार के लिये 75 हज़ार रूपये दिये गये हैं, जच्चा-बच्चा खर्च के लिये 26 लोगों को 2 लाख 15 हज़ार रूपये दिये गये हैं औ 12 लोगों को नियमित पेंशन  दी जा रही है।

पश्चिमी  जिला के श्रमायुक्त लल्लन जी ने मज़दूरों को सम्बोधित कर कहा कि बहुत से निर्माण कामगार ऐसे हैं जो समय पर अपनी पासबुक का नवीनीकरण नहीं कराते हैं। यदि समय पर पासबुक नवीनीकरण नहीं होगा तो पासबुक कैन्सिल हो सकती है जिससे मज़दूर लाभ लेने से वंचित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मज़दूरों को जागरूक होना पड़ेगा लाभ लेने के लिये। जो निर्माण मज़दूर का काम करते हुए हादसे का षिकार हो जाते हैं वह लोग कर्मचारी क्षतीपूर्ती अधिनियम 1923 है जिसके तहत मज़दूर मुआवजे का दावा कर सकता है। दावा करने पर पैसा अवष्य मिलता है। बोर्ड से मिलने वाले लाभ भी मज़दूरों को मिलेगे और बोर्ड में जो कमियां हैं उसे दूर करने का प्रयास करेंगे ताकि हम आपकी दिल से सेवा कर सकें।

ट्रेड यूनियन कोर्डिनेशन  सेन्टर के महा सचिव एसपी तिवारी जी ने कहा कि भारत के विभिन्न राज्यों में निर्माण कामगारों का जो कोश है 10 से 11 हज़ार करोड़ है। लेकिन इस बात का है कि इतना पैसा है और कामगार भी हैं लेकिन कामगारों तक यह पैसा पहुंचाने की कोई व्यवस्था सरकार नहीं कर रही है। जो संगठित क्षेत्र के कामगार हैं जिनका पीÛएफÛ, ईÛएसÛआई जैसे सुविधायें प्राप्त हैं और उत्तम वेतन प्रात्प है उनके लिये तो बड़े-बड़े टेªड यूनियन के लड़ाई लड़ते हैं और जीवन के तमाम हक़ दिलवायें हैं। Image

लेकिन देश  में जो कामगार सबसे ज्यादा उपेक्षित हैं और जिनकी सख्या जब्रदस्त बढ़ती जा रही है वे हैं निर्माण कामगार। आंकड़ों के हिसाब से 2001 में भारत में निर्माण कामगारों की संख्या 1 करोड़ के लगभग थी। आज इन कामगारों की संख्या लगभग 5 करोड़ हो चुकी है। देखने में आया है कि निर्माण कामगारों के कोश का पैसा अधिकारियों के लिये कार, मोबाइल फोन, और मण्डप बनाने में खर्च किया जा रहा है। जो लोग निर्माण कामगारों का पैसा फालतु कामों में खर्च करते हैं वह अपराध करते हैं। निर्माण कामगारों का पैसा उनको लाभ पहुंचाने में काम आना चाहिये। उन्होने कहा कि कामगारों जागरूक होना पडे़गा और अपने अधिकारों छीनना पड़ेगा।

लोक राज संगठन के बिरजू नायक जी ने बताया कि आज तक मज़दूरों के लिये जो भी कानून बने हैं सरकार ने अपनी ख़ुशी  से नहीं बनाये हैं मज़दूरों ने हज़ारों संघर्ष  कर के अपने लिये कानून सरकार से बनवाये हैं। लेकिन वे कानून मज़दूरों पर सही ढंग से लागू नहीं होते हैं। स्वास्थ्य के लिये मिलने वाले 30 हज़ार रूपये तक सरकार मज़दूरों को नहीं दे पाती है वहीं उसके उलट बड़े- बड़े पूंजीपतियों कों कम्पनी चलाने के लिये हज़ारों करोड़ रूपये बैंको द्वारा दे दिये जाते हैं।
कम्पनी को घाटा होने पर पूरा का पूरा कर्ज़ माफ कर दिया जाता है। उन्होने कहा कि मैं खुद एक मज़दूर का बेटा हूं। मेरे पिता जी ने पूरे तीस साल काम किया अपने श्रम से देष को योगदान दिया। लेकिन उनको पेंषन मिलती है केवल 338 रूपया। हम देष चलाते हैं, उत्पादन करते हैं हमारे श्रम के बिना यह देष नहीं चल सकता है। जब कामगार  देश चला सकते हैं तो देष का षासन भी चला सकते हंै। इसलिये मज़दूर वर्ग में राजनैतिक चेतना होनी चाहिये।

साल भर में संगठन द्वारा किये गये कार्य की वार्षिक  रिपोर्ट सदस्यों के सामने प्रस्तुत कर रमेन्द्र कुमार जी ने बताया कि दिल्ली निर्माण मज़दूर संगठन दिल्ली में रहने एवं काम करने वाले निर्माण मज़दूरों का संगठन है। संगठन का उद्देश्यः निर्माण मज़दूरों मे उनके अधिकारों के प्रति चेतना जागृत करना, निर्माण श्रमिकों के बीच सशक्त संगठन की स्थापना करना, तथा दिल्ली भवन एवं सन्निर्माण मज़दूर कल्याण बोर्ड की योजनाओं का लाभ निर्माण मज़दूरों तक पहुॅचाना है।
निर्माण मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा को सुनिशिचत करने के लिये भारत सरकार ने 1996 में भवन एवं सन्निर्माण श्रमिक (रोजगार नियमन तथा सेवा षर्त) अधिनियम 1996 नामक एक कानून बनाया था। इस कानून के अंतर्गत प्रत्येक राज्य सरकार को एक निर्माण मज़दूर कल्याणकारी बोर्ड का गठन करना था। दिल्ली मे दिल्ली भवन एवं सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड का गठन 2002 मे किया गया और 2005 में इस बोर्ड में निर्माण मज़दूरों का पंजीकरण आरम्भ हुआ। बोर्ड के माध्यम से सभी निर्माण मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा जैसे स्वास्थ्य सुविधा, दुर्घटना एवं आकस्मिक निधन पर मुआवजा, विकलांगता, बुढापे मे पेंशन, बच्चांे की शिक्षा, प्रसूति सहायता, घर एवं औजार के लिये कर्ज इत्यादि देने का प्रावधान है।Image

वर्तमान में संगठन दिल्ली की 130 झुग्गी बस्तियों, पुनर्वास बस्तियों एवं अनाधिकृत कालोनियों मे रहने वाले तथा 10 लेबर चैक के निर्माण श्रमिकों के साथ कार्य कर रहा है। लगभग 1000 नुक्कड़ सभाओं का आयोजन किया औरं करीब 30,000 श्रमिकों ने इन सभाओं में हिस्सा लिया। बोर्ड में निर्माण मज़दूरों के पंजीकरण की प्रक्रिया तथा लाभ की जानकारी दी। संगठन के फैलाव और मजबूती के लिये लगभग 150 आम सभायें की।30 क्षेत्रीय परामर्श के माध्यम से पंजीकरण की प्रक्रिया और उसमें आने वाली अड़चनों के उपर चर्चा हुई। निर्माण मज़दूरों के कानून मे संसोधन को लेकर जंतर मंतर पर एक दिवसीय धरने का आयोजन किया गया।

चुने गये प्रतिनिधियों के साथ 10 कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। शिक्षा निदेशालय, दिल्ली सरकार के द्वारा अनुमानतः 3000 बच्चों के बीच 40 लाख की छात्रवृति बांटी गई। प्राइमरी कक्षा के 22 बच्चों को छात्रवृति स्वीकृत की गई।
संगठन की सदस्यताः वर्श 2013 मे कुल 5179 निर्माण मज़दूरों ने संगठन की सदस्यता ली।

संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा निर्माण मज़दूरों के मुद्दे पर निर्मिम डाक्यूमेन्ट्री फिल्म शहरों  के निर्माता दिखाई गई जिसे लोगों ने खूब पसंद किया। अंत में संगठन के गीतों के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

-रवि कुमार सक्सेना


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