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केजरीवाल जी झुग्गीवासियों से बिना मिले ही चले गये


मानसरोवर स्थित झुग्गी-बस्तियों को रेल्वे अधिकारियों द्वारा तोड़ दिया गया था। मानसरोवर कड़कड़डूमा विधान सभा क्षेत्र में आता है। इसी क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के नेता मनीश सिसौदिया ने चुनाव लड़ा था और झुग्गीवासियों से वायदा किया था कि आम आदमी पार्टी सत्ता में आई तो सबको पक्के मकान दिये जायेंगे।
इसी वायदे को याद दिलाने के लिये कड़कड़डूमा के झुग्गीवासी दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से मिलने के लिये उनके घर गाजियाबाद पहुंचे।

लोगों को पूरी उम्मींद थी कि आम आदमियों के रहनुमा केजरीवाल उनसे मिलने जरूर आयेंगे। जनता दरबार लगाने वाले केजरीवाल जी लोगों से बिना मिले ही चले गये। और झुग्गीवासियों की केजरीवाल से मिलने की उम्मींद मुख्यमंत्री जी के कार से निकले धुऐं के समान उड़ गई।

अब यहां सवाल यह उठता है कि केजरीवाल जी के पास पुलिस तंत्र को सुधारने के लिये धरना देने का समय है। लेकिन जो लोग कई दिनों से बेघर हैं, उन लोगों से बात करने तक का समय नहीं है। क्या यह मान लिया जाये कि आम आदमी की श्रेणी में झुग्गी-बस्ती के लोग नहीं आते?

-Ravi Kumar

निर्माण मज़दूरों ने अपनी समस्याओं को लेकर श्रम मत्री जी को हस्ताक्षर सहित पत्र भेजे


दिल्ली भवन एवं सन्निर्माण मज़दूर कल्याण बोर्ड में निर्माण मज़दूरों का पंजीकरण की प्रक्रिया सभी जिलों में अलग अलग है तथा इसके लिये दस्तावेज भी अलग अलग मांगे जाते हैं। निर्माण मज़दूर का पंजीकरण आवेदन की तिथी से 30 दिन के अन्दर होना चाहिए लेकिन अभी पंजीकरण में 3 महीने से 9 महीने का समय लगता है। निर्माण श्रमिकों को प्रतिवर्श वार्शिक अनुदान जमा करना होता है जिससे उनकी सदस्यता कायम रहे तथा बोर्ड से उन्हें समयानुसार लाभ भी मिलता रहे। वार्शिक अनुदान जमा करवाने की प्रक्रिया तथा इसमें मांगे जाने वाले दस्तावेज भी सभी श्रम जिला कार्यालयों में अलग अलग है। दिल्ली भवन एवं सन्निर्माण मज़दूर कल्याण बोर्ड से मिलने वाले लाभ मज़दूरों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

लाभ लेने की प्रक्रिया बहुत जटिल है और उसके लिये क्या दस्तावेज चाहिए इसकी स्पश्टता भी नहीं हैं। इसलिये मज़दूरों को लाभ लेने में 1 से 2 वर्श या इससे भी ज्यादा समय लगता है।
मृत्युउपरान्त मिलने वाला लाभ भी दो वर्श बाद मिलता है उसी प्रकार मातृत्व लाभ जो कि गर्भावस्था में मिलना चाहिये। उसमें भी दो वर्श से ज्यादा का समय लगता है। प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को अभी तक षिक्षा सहायता नहीं मिली। सामाजिक सुरक्षा का कानून होने के बावजूद भी आज किसी भी निर्माण श्रमिक को स्वास्थ्य सहायता नहीं मिन रही है। आज कोई पंजीकृत मज़दूर बीमार पड़ जाये या कोई दुर्घटना हो जाये तो उसे कोई भी सहायता नहीं मिलती।
अधिकतर श्रम कार्यालयों में निर्माण मज़दूरों के पंजीकरण, वार्शिक अनुदान के रिकार्ड सही ढंग से नहीं रखे जा रहे हैं जिसकी वजह से मज़दूरों को मिलने वाले लाभ उन तक नहीं पहुंच रहे हैं। दिल्ली भवन एवं सन्निर्माण मज़दूर कल्याण बोर्ड में सेस इकट्ठा करने की न तो कोई प्रक्रिया है और न ही सम्पूर्ण रिकार्ड है और न ही सेस निगरानी की कोई व्यवस्था।

दिल्ली भवन एवं सन्निर्माण मज़दूर कल्याण बोर्ड एक त्रिपक्षीय बोर्ड है जिसमें सरकार, मज़दूर एवं ठेकेदारों का बराबर का प्रतिनिधित्व होना चाहिए परन्तु वर्तमान बोर्ड में ठेकेदारों एवं मज़दूरों का समान प्रतिनिधित्व नहीं है।
दिल्ली भवन एवं सन्निर्माण मज़दूर कल्याण बोर्ड वर्तमान में श्रम विभाग के अधीन कार्य कर रहा है जिला श्रम कार्यालयों के अधिकारी श्रम विभाग के कार्यों के साथ निर्माण मज़दूर बोर्ड के कार्यों की जिम्मेदारी जिसकी वजह से पंजीकरण तथा लाभ स्वीकृति में देरी होती है।
इन समस्याओं से निजात पाने के लिये दिल्ली निर्माण मज़दूर संगठन की इकाईयों ने विभिन्न क्षेत्रों से अपनी मांगों लेकर हस्ताक्षर सहित माननीय श्रम मंत्री जी को पत्र लिखे
मांगे इस प्रकार से हैंः
1. निर्माण मज़दूर का पंजीकरण आवेदन की तिथी से 30 दिन के अन्दर होना चाहिए। निर्माण मज़दूरों के पंजीकरण की प्रक्रिया सभी जिलों में एक समान होनी चाहिये। पंजीकरण में देरी होने पर अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाये।
2. बोर्ड से मिलने वाले विभिन्न लाभ के लिये प्रक्रिया एवं दस्तावेज सभी जिलों में एक समान होनी चाहिये। आवेदन की तिथी से 30 दिन के अन्दर सभी लाभ मज़दूरों तक पहुंचने चाहियें।
3. दिल्ली के निर्माण मज़दूरों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिये कर्मचारी बीमा निगम की योजना का लाभ मज़दूरों तक पहुंचे।
4. दिल्ली भवन एवं सन्निर्माण मज़दूर कल्याण बोर्ड श्रम विभाग से स्वतंत्र होकर कार्य करे और बोर्ड का विकेन्द्रीकरण जिला स्तर पर हो।
5. दिल्ली भवन एवं सन्निर्माण मज़दूर कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन हो तथा बोर्ड में ठेकेदार तथा मज़दूर संगठनों का समान प्रतिनिधित्व हो और प्रतिनिधित्व का आधार पारदर्षी हो।
6. सेस कानून का पालन सही तरीके से हो तथा सेस वसूली, निगरानी तथा रिकार्ड सही ढंग से रखें जायें।
7. निर्माण मज़दूरों के पंजीकरण के रिकार्ड भी सभी जिला श्रम कार्यालयों में सही ढंग से रखें जायें।


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received a scholarship checks but after the date


Primary school children received a scholarship but after the date
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