DELHI SHRAMIK SANGATHAN

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संगठन के सदस्यों के संग क्षमता निर्माण बैठक


संगठन के सदस्यों के संग क्षमता निर्माण बैठक

आमतौर पर देखा गया है कि गरीब तबके के लोग सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों के सामने बोलने से डरते हैं। और अपना परिचय तक ठीक ढंग से नहीं नहीं दे पाते हैं। इसका एक बहुत बड़ा कारण यह है कि लोगों में इस बात की जानकारी न के बराबर होती कि सरकारी दफ्तरों के अधिकारी जनता की सेवा के लिए होते हैं। इनका काम ही होता है जनता की समस्याओं को सुनना और हल करना।
गरीब तबके के लोगों में जागरूकता होने के कारण यह लोग आये दिन भ्रष्टाचार के शिकार होते हैं। इसी हिचक और डर को निकालने के लिए दिल्ली निर्माण मज़दूर संगठन द्वारा दिनाॅक- 27/8/13 को लोखण्डे भवन विकास नगर में संगठन के सदस्यों के संग संचार क्षमता का निर्माण करने हेतु बैठक का आयोजन किया गया।
सभी सदस्यों से पूछा गया कि आप अपना और संगठन का परिचय कैसे देंगे? सभी लोगों ने आधा-अधूरा परिचय दिया। लोगों को बताया गया कि परिचय देते समय रूकना, हकलाना, हिचकना और डरना नहीं चाहिए।
अपना पता, संगठन का नाम आप कौन हो और क्या करते हो अच्छे याद रहना चाहिए। अपना पूरा परिचय आत्मविश्वास के साथ देना चाहिए क्योंकि आपका आत्मविश्वास लोगों प्रभावित करता है। आपके व्यक्तित्व को निखारता है। आप संगठन के सदस्य हैं आपको संगठन के बारे में और मज़दूर कानूनों व अधिकारों केे बारे में अच्छा ज्ञान होना चाहिए। तभी आप अपने हक़, पहचान और सम्मान के लिए लड़ पायेंगे।ImageImageImage

दिल्ली श्रमिक संगठन द्वारा प्रकाशित कुछ पुस्तके


 दिल्ली श्रमिक संगठन द्वारा प्रकाशित कुछ पुस्तके

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यह पुस्तक जन क्रान्तिकारी गीतों से सजी हुई है।इस पुस्तक में किसान मज़दूर और आदिवासियों के संघर्ष व क्रान्ति की दास्तान गीत के रूप में शामिल हैं।

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झुग्गी बस्ती में रहने वाले गरीब मज़दूरों के लिए घर के अधिकार का कानून बनाने की मांग को लेकर दिल्ली श्रमिक संगठन द्वारा 2006 में दिल्ली की 107 झुग्गी बस्ती 8 दिवसीय साईकल रैली निकाली। साईकल रैली के दौरान हुए खटटे मीठे अनुभवों को बयां करती है यह पुस्तक।            Image

राशन में बड़ते भ्रष्टाचार के खिलाफ संघसर्ष की कहानी है यह पुस्तक, राशन दुकानदार की मनमानी और राशन की भ्रष्ट व्यवस्था पर पर प्रहार करते लोगों की दांस्तां से सजी हुई है यह पुस्तक।

ऐसा फ्लैट भी किस काम का जो परिवारों को बांट दे?


इन दिनों तमाम अखबारों में विकास पुरी की झुग्गी बस्तियों को द्वारका सेक्टर 23 में बसाने को लेकर चर्चा गर्म है। दिल्ली विकास प्राधीकरण के मुताबिक विकास पुरी की 6 बस्तियों को 2014 के चुनाव से पहले द्वारका सेक्टर 23 के ESW फ्लैटों में पुनर्वास कर बसाया जायेगा। सरकार ने जब अखबारों के माध्यम से यह घोषणा की कि विकास पुरी के झुग्गीवासियों को द्वारका में में बसाया जायेगा तो झुग्गीवासियों का खुशी का ठिकाना न रहा।
बस्ती के कुछ लोग उत्साहित होकर द्वारका सेक्टर 23 में यह देखने गये कि हमारे सपनों का घर सरकार ने कैसा बनाया है? इन्द्रा कैम्प न0 4 विकास पुरी के निवासी दर्शन लाल जी सहित अन्य लोगों ने आखों देखा हाल बताया कि बहुमंजिलीये इमारत अच्छे ढंग से बनाई गई है, पार्क की सुविधा भी अच्छी है, शांत वातावरण है कुल मिलाकर सब ठीक है।
लेकिन इसमें एक बात हताश करने वाली बात यह है कि फ्लैट का साइज़ बहुत ही छोटा है। मैं एक प्लम्बर हुं मैंने इससे बड़े तो बाथरूम देखे हैं। मैं इसे फ्लैट कहूं या बाथरूम। इतने छोटे फ्लैट में मां बाप, बहन, बहू और बेटा पूरा परिवार अपनी प्राइवेसी के साथ नहीं रह सकता। इस फ्लैट में मां-बाप या फिर बेटा और बहू ही रह सकते हैं। ऐसा फ्लैट भी किस काम जो परिवारों को बांट दे?हमारे द्वारा चुने गए एक-एक नेताओं के पास हजारों गज के फार्म हाउस आलीशान कोठियां होती हैं, और गरीब मज़दूर लोगों के लिए फ्लैट के नाम महज एक चिडि़या का घोसला।

-Ravi Kumar Saxena

हक जानों, हक लो


दिल्ली निर्माण मज़दूर संगठन

दिल्ली निर्माण मज़दूर संगठन दिल्ली में रहने एवं काम करने वाले निर्माण मज़दूरों का संगठन है। संगठन का उद्देश्य निर्माण मज़दूरों में चेतना जागृत करना, उनके बीच सशक्त संगठन की स्थापना करना तथा दिल्ली भवन एवं सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड योजनाओं का लाभ निर्माण मज़दूरों तक पहुंचाना।
दिल्ली निर्माण मज़दूर संगठन दिल्ली श्रमिक संगठन का एक सदस्य संगठन है। दिल्ली श्रमिक संगठन असंगठित क्षेत्र के मज़दूर संगठनों का महासंघ है।
जिसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों के बीच चेतना निर्माण करना, काम के आधार पर संगठन निर्माण करना, मज़दूरों के काम एवं घर की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा असंगठित क्षेत्र सामाजिक सुरक्षा कानून 2008 का लाभ असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों तक पहुंचाना है।
निर्माण मज़दूरों के काम की स्थिति आज भी अत्यंत ही चिंताजनक है। सभी मज़दूरों को नियमित रूप से काम तथा मज़दूरी नहीं मिल पाती है।
सामाजिक सुरक्षा जैसे स्वास्थ्य सुविधा, दुर्घटना एवं आकस्मिक निधन पर मुआवजा, विकलांगता, बुढ़ापे में पेंशन, बच्चों की शिक्षा, प्रसूति सहायता, घर एवं काम के औजार के लिए कजऱ् इत्यादि का लाभ आज निर्माण मज़दूरों को नहीं मिल पा रहा है।
निर्माण मज़दूरों की सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने 1996 में भवन एवं सन्निर्माण श्रमिक कल्याण अधिनियम 1996 नामक एक कानून बनाया था।
इस कानून के तहत देश के सभी निर्माण मज़दूरों को सामाजिक सुरक्षा मिलनी थी लेकिन आज भी यह सुविधा निर्माण मज़दूरों तक नहीं पहुंच पा रही है। जिसका कारण निर्माण मज़दूरों का अधिकारो के प्रति जागरूक न होना तथा एक मज़बूत संगठन का आभाव है।
दिल्ली निर्माण मज़दूर संगठन समान विचारधारा वाले अन्य संगठनों के साथ मिलकर दिल्ली भवन एवं सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड निहित वर्तमान सुविधाओं को बढ़ाने एवं उसमें सकारात्मक सुधार की मांग को लेकर 12 अक्टूबर 2011 को जन्तर मन्तर पर एक विशाल धरने का आयोजन किया गया था। धरने के उपरान्त सरकार ने मज़दूरों को मिलने वाले लाभ में बढ़ोतरी की जो कि इस प्रकार है।
पंजीकरण के तुरन्त बाद मिलने वाले लाभ
1. प्रसूति लाभ पंजीकृत महिला सदस्य एवं पुरूष सदस्य की पत्नी को 10,000 रूपये प्रसूति लाभ ;दो प्रसव के लिए
2. अपंगता पेंशनरू जो सदस्य पक्षाघात, क्षयरोग, कुष्ठरोग, दुर्घटना आदि के कारण स्थाई रूप से असशक्त/अपंग होने पर पेंशन के रूप में 1000 रूपये। पेंशन के अलावा अपंगता के प्रतिशत के आधार पर अधिकतम 25,000 हज़ार रूपाये का भुगतान।
3. अनत्येष्टि सहायताः सदस्य की मुत्यु की स्थिति में सदस्य के नामित एवं आश्रित को पांच हज़ार रूपये दाह संस्कार के लिए अनुदान।
4. मुत्यु लाभः सदस्य की मुत्यु की स्थिति में उसके मनोनित/आश्रित को मुत्यु लाभ के रूप में 50 हज़ार तथा रोजगार के दौरान दुर्घटना वश हुई मुत्यु पर एक लाख रूपये की सहायता।
5. शिक्षा सहायता एक परिवार के दो बच्चों के लिए है। कक्षा पहली से आठवीं तक के स्टुडेंट को 1200 रूपये प्रतिवर्ष, कक्षा 9वीं से 10वीं तक के स्टुडेंट को 2400 रूपये प्रतिवर्ष तथा 11वीं और 12वीं के स्टुडेंट को 6000 पये प्रतिवर्ष मिलेंगे।
बोर्ड में पंजीकरण के एक वर्ष बाद मिलने वाले लाभः
1. 60 वर्ष की उम्र के बाद 1000 रूपये प्रति माह का पेंशन। पांच वर्ष से अधिक सदस्यता के होने पर 100 रूपये की बढ़ोतरी प्रत्येक पूर्ण वर्ष के लिए।
2. भवन की खरीद या निर्माण के लिए लोन के रूप में एक लाख पचास हज़ार रूपये तक की राशि।
3. शिक्षा सहायता स्नातक स्तर के स्टुडेंट के लिए 18,000 प्रतिवर्ष, पोलिटेकनिक/डिप्लोमा ;3 वर्षद्धण् 30,000 प्रतिवर्ष, तकनीकि पाठयक्रम जैसे इंजीनियरींग, चिकित्सा, एमबीए-60,000 प्रतिवर्ष।
4. पारिवारीक पेंशनः पेंशन भोगी की मुत्यु होने पर पारिवारीक पेंशन जीवित पति/पत्नी को दी जायेगी। पेंशन की राशि पेंशन भोगी द्वारा प्राप्त की जाने वाली राशि का पचास प्रतिशत या पांच सौ रूपये इनमें जो अधिक हो मिलेगी। आवेदन मुत्यु की तिथी से तीन माह के अन्दर करना होगा।
बोर्ड में पंजीकरण के तीन वर्ष बाद मिलने वाले लाभः
1. कार्य सम्बंधी औजार की खरीद के लिए लोन के रूप में 10,000 रूपये तक की राशि। योग्यता-नियमित रूप से बोर्ड में अंशदान और आयु 55 वर्ष से कम।
2. विवाह हेतु वित्तीय सहायताः पंजीकृत महिला सदस्य का विवाह -10,000 रूपये, पंजीकृत पुरूष सदस्य का विवाह हेतु-5,000 रूपये, पंजीकृत व्यक्ति की बेटी के विवाह हेतु-10,000 रूपये, पंजीकृत व्यक्ति के बेटे के विवाह हेतु-5,000 रूपये।

आप सभी साथियो से अपील है कि संगठन से जुड़े, जानकारी ले, संगठित हों और अपने अधिकारों को हासिल करें।

शहरों के निर्माता (The Construction worker)


http://www.youtube.com/watch?v=Gcxj0fQkG_I

Coming Soon documentary Movie

Delhi Shramik Sangathan

Present
शहरों के निर्माता (The Construction worker)
a film by
Delhi Nirman Mazdoor Sangathan

10,000 low-cost flats to slum dwellers in Delhi soon- The Economic Times


NEW DELHI: With an eye on upcoming assembly polls, Delhi government today decided to start allotment of around 10,000 low-cost flats soon to slum dwellers in keeping with its plan to make the national capital slum-free.
The decision to distribute the flats was taken at a Cabinet meeting presided over by Chief Minister Sheila Dikshit.

Economically weaker sections flats to be allotted soon- Times Of India


NEW DELHI: The Delhi Development Authority flats for EWS in Dwarka may find their inhabitants soon. Low-cost housing was the prime focus of the authority meeting which was chaired by Najeeb Jung, lieutenant governor. It was then unanimously decided to allot these flats to eligible beneficiaries in nearby JJ clusters and the process for identifying them may begin in a month, said sources. However, the authority is yet to work out a finance model for recovering the cost of these flats, which are priced higher than most EWS projects.

The allotment of economically weaker sections (EWS) flats was the priority in the Friday meeting and is expected to be the main issue in the next meeting also. “Low-cost housing is a priority and a number of slum clusters have been surveyed for eligible beneficiaries. The EWSflats in Dwarka will be part of DDA’s resettlement policy and not any housing scheme. Allotments should begin soon,” said non-official member Harsh Vardan. The 2,400 one-bedroom flats in Dwarka have been ready for the last few months. According to sources, some slum clusters in Vikaspuri have been surveyed already by DDA.

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