DELHI SHRAMIK SANGATHAN

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Monthly Archives: June 2013

किशोर बच्चों ने दिखाया अभिनय का हुनर


दिल्ली श्रमिक संगठन द्वारा लोखण्डे भवन विकास नगर में किशोर किशोरियों के संग चार दिवसीय नाटक कार्याशाला आयोजित की गई। DDA द्वारा पुनर्वासित शिव विहार जे जे कालोनी हस्तसाल के किशोर बच्चों ने इस कार्याशाला में हिस्सा लिया। कार्याशाला के दौरान इन्हें चेहरे के हाव-भाव, आंगिक भाषा तथा नाटक से जुड़ी तमाम एक्सरसाइज़ कराई गईं। Image

किशोर किशोरियों को किन्हीं तीन विशयों पर खुद से लघु नाटक बनाने की एक्सरसाइज दी गई, इन बच्चों ने अपनी सूझ-बूझ से दामिनी रेप केस, बाल श्रम, और नशे के बेहद संवेदनशील मुददे पर छोटे-छोटे नाटक बनायें।  घरेलू कामगार महिलाओं को समाज सम्मान

की नज़र से नहीं देखता है, इन महिलओं के साथ आर्थिक शोषण से लेकर शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण तक होता है। इसी स्थिति को दिखाने के लिए घरेलू कामगार के मुददे पर एक पूरा नाटक बनाया गया।

Imageकिशोर किशोरियों ने मौज मस्ती व अनुशासन का पालन करते हुए नाटक सीखा और एक नया नाटक बनाने में अपना सहयोग दिया। इस नाटक में बच्चों समीत 26 किशोर किशोरियों ने भाग लिया। दिल्ली श्रमिक संगठन के कार्यकर्त्ता रवि कुमार सक्सेना जी के द्वारा नया नाटक घरेलू कामगार का डायरेक्शन किया गया।

–Ravi Kumar

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विकास नगर लोखण्डे भवन में किशोरावस्था के बच्चों के साथ सामुदायिक रेडियो के विषय में कार्यशाला आयोजित की गई।


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झुग्गी के बदले नहीं मिला घर तो करेंगे प्रदर्शन


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दिल्ली श्रमिक संठन के बैनर तले शकुर बस्ती में झुग्गी झोपड़ी के मुद्दे पर महा सभा का आयोजन स्थानीय लोगों द्वारा किया गया।  

बस्तीवालों ने सभा में बताया कि नारथन रेल्वे वालों ने हमारी बस्ती में 4 अप्रेल 2013 को बस्ती तोड़ने का नोटिस लगाया कि जल्द से जल्द झुग्गियां खाली करें। नोटिस लगाने के बाद रेल्वे वालों ने यह अभी तक नहीं बताया है कि बस्ती तोड़ने के बाद बस्तीवालों का कहां पुनर्वास किया जायेगा।
बस्तीवालों ने पूछा कि क्या कोई ऐसा उपाय है जिससे हमारी बस्ती बच जाये या टूटने के बाद हमें जगह मिले?

बिन्दु जी ने प्रश्न का उत्तर देते हुए बताता कि यदि रेल्वे वालों को इस जमीन की जरूरत है तो बस्ती टूटना तय है  पुरानी स्लम नीति के तहत रेल्वे, पार्क और नाले की जमीन पर बसी बस्तियों को पुनर्वास के लिए अयोग्य माना जाता था लेकिन नई स्लम नीति के तहत के इन जमीनों पर बसी बस्तियों का पुनर्वास करना योग्य माना गया है।

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 अगर नारथन रेल्वे वाले आपकी बस्ती को तोड़ते हैं तो इस नीति के तहत आपके पुनर्वास की व्यवस्था करनी होगी। बस्तीवालों को इस जानकारी से थोड़ी राहत तो मिली ही है लेकिन इसी के साथ बस्ती के लोगों ने कहा कि यदि सरकार हमें घर के बदले जमीन नहीं देती है तो हम शान्ति आर अहिंसा के साथ धरना प्रदर्शन करेंगे।

 

-Ravi Kumar

 

work in progress


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दिल्ली श्रमिक संगठन एक फेडरेशन है और इस फेडरेशन में २ संगठन और है एक दिल्ली निर्माण मजदूर संगठन और दूसरा दिल्ली घरेलु कामगार संगठन. दिल्ली निर्माण मजदूर संगठन दिल्ली के राजमिस्त्री, कारपेंटर, एलेक्ट्रिसं, बेलदार, पैटर, घिसाई, वल्डर और सिषा जैसे आदि काम करने वाले लोगो का पंजीकरण दिल्ली के लेबर बोर्ड में करता है और उनसे मिलने वाले लाभों की जानकारी मजदूरों को देता है ताकि वह आपने हक़ के लिए लड़ का ले सके ।

दिल्ली घरेलु कामगार संगठन के काननू की मांग चल रही है।

 

 

 

 

 

Asit Heera

करन्ट लगने से मज़दूर घायल, संगठन के हस्तक्षेप के बाद मिला मुआवजा


कुलदीप एक निमार्ण मज़दूर है वह राजमिस्त्री का काम करता है। 22 मई 2013 को उत्तम नगर हस्तसाल रोड स्थित एक मकान में चुनाई का काम कर रहा था काम करते समय कुलदीप का सिर छत के ऊपर से जा रहीं बिजली के तार से टकरा गया और वह करन्ट का झटका लगने से छत के नीचे गिर गया जिससे उसके सिर और हाथ पैर में गम्भीर चोटें आई।
ठेकेदार ने आनन फानन में उत्तम नगर के प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती करा दिया घायल मज़दूर के परिजनों ने जब ठेकेदार और मालिक से मुआवजे की मांग की तो दोनों मुआवजा देने से साफ मुकर गए।
हताश परिजन जोकि पहले से दिल्ली निर्माण मज़दूर संगठन के मेम्बर हैं, ने सारा घटनाक्रम संगठन के कार्यत्ताओं को बताया।
कार्यत्ताओं ने ठेकेदार और मालिक को चेताया कि कार्यस्थल पर दुर्घटना में घायल हुए व्यक्ति को देना कानूनी रूप से अनिवार्य है यदि आप उसे मुआवजा नहीं देंगे तो आपके खिलाफ मुआवजा न देने के जुर्म में उचित कानूनी कार्यवाही की जायेगी।
कार्यवाही के भय और संगठन के हस्तक्षेप करने के बाद घायल निर्माण मज़दूर कुलदीप को इलाज कराने के लिए 35 हज़ार का मुआवजा मिला।

-Ravi Kumar

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